Jaishankar Prasad Ka Jeevan Parichay | जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय

जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के महान कवि रहें हैं, उन्होंने अनेक विधाओं पर अपनी लेखनी चलाई। आज की इस पोस्ट में जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय (Jaishankar Prasad Ka Jeevan Parichay ) लिखा गया है। यह जीवन परिचय हर कक्षा की परीक्षा के लिए उपयोगी है। परीक्षा की इसी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए सुनिश्चित शब्द गणनाओं में जीवन परिचय से जुडी जानकारी दी गई है। जयशंकर प्रसाद की रचनाओं और साहित्यक विशेषताओं पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है।

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Jaishankar Prasad Jivan Parichay in Hindi

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय

जीवन परिचय-

हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रवर्तक व मूर्धन्य साहित्यकार जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad) का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में सन् 1889 ई॰ में हुआ था। उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था और वह सुंघनी साहू के नाम से विख्यात था। परंतु जब वह 12 वर्ष के थे तब उनके पिता बाबू देवी प्रसाद का आकस्मिक निधन हो गया। फलतः जयशंकर प्रसाद को अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। उनके बड़े भाई ने परिवार की दशा को संभाला व उनकी घर पर पढ़ाई की व्यवस्था की। फलतः उन्हें हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी आदि भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिला। परन्तु बड़े भाई की आकस्मिक मृत्यु ने जयशंकर प्रसाद के जीवन को पुनः दुःख व संकटों के सागर में धकेल दिया। उन्होंने दुकान पर बैठकर ने केवल साहित्य की रचना की बल्कि परिवार को भी संभाला व अपने पिता के ऋण को भी उतारा। सन् 1937 में हिन्दी के इस महान् सपूत का स्वर्गवास हो गया।

जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ (Jaishankar Prasad Ki Rachnaye)

जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad) बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने अपने जीवन में साहित्य की अनेक विधाओं पर लेखनी चलाई उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-

  • काव्य संग्रह- आंसू, लहर, चित्राधार, करुणालय, प्रेम-पथिक, कानन-कुसुम, झरना, महाराणा का महत्त्व, कामायानी।
  • नाटक- एक घूंट, राज्यश्री, कामना, जनमजेय का नागयज्ञ, विशाख, अजातशत्रु, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त ध्रुवस्वामिनी।
  • कहानी- संग्रह छाया, प्रतिध्वनि, आकाशदीप, आंधी, इंद्रजाल।
  • उपन्यास- कंकाल, तितली, इरावती (अधूरा) ।
  • निबंध- काव्यकला और अन्य निबंध।

साहित्यिक विशेषताएँ (Jaishankar Prasad KI Kavyagat Visheshta)

जयशंकर प्रसाद हिन्दी साहित्य के विशिष्ट कथाकार नाटककार एवं कवि हैं उनके साहित्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

अतीत का गौरवगान जयशंकर प्रसाद ने अपनी अधिकांश कहानियों में ऐतिहासिक वातावरण व घटनाओं को आधार बनाया है। उनकी कहानियों में हमें अपने देश के उज्ज्वल व गौरवमयी अतीत के अनेक दर्शन दृश्य देखने को मिलते हैं। परंतु उनकी कहानियाँ केवल इतिहास-मात्र नहीं है, बल्कि उनमें कल्पना का भी अद्भुत सम्मिश्रण किया गया है। जहाँ एक और वे देश के गौरवशाली अतीत एवं समृद्ध संस्कृति को अपनी कहानियों में चित्रित करते हैं, वही वह देश व समाज की कुरीतियों को भी उद्घघाटित करते हैं। अतः कहा जा सकता है कि उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से तत्कालीन देश की शोषित, दलित व उपेक्षित जनता को उसके गौरवशाली अतीत का स्मरण कराकर उसमें एक नई चेतना भरने का प्रयास किया है।

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उदात्त प्रेम-  भावना जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad) की कहानियाँ में प्रेम तत्वों का प्राधान्य है। परंतु उन्होंने नर नारी के प्रेम को वासनात्मक रूप में नहीं दर्शाया है बल्कि उनका प्रेम तो त्याग, बलिदान, आत्मसमर्पण व परोपकार पर आधारित है। गुंडा, आकाशदीप आदि कहानियों में उन्होंने प्रेम को आध्यात्मिक स्तर पर पहुंचा दिया है। अतः कहा जा सकता है कि प्रसाद की कहानियों में उदात्त-प्रेम की भावना का निरूपण हुआ है। राष्ट्रीय-भावना जयशंकर प्रसाद के युग में भारत परिधान पराधीन था।

एक सच्चे साहित्यकार एवं देशभक्त के रूप में जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad) ने अपने साहित्य के माध्यम से अपने राष्ट्रप्रेम को भी दर्शाया है। उनकी कहानियों के अधिकांश पात्र देश व समाज की रक्षा के लिए अपने जीवन, प्रेम, धन-संपदा आदि को त्याग देते हैं। उनकी कहानियों के नर-नारी, बाह्य-शक्तियों का विरोध करने के लिए तुरंत तत्पर हो उठते हैं। प्रसाद ने अपने देश के गौरवशाली अतीत, समृद्ध संस्कृति आदि का चित्रण करके देशवाल भी देशवासियों में एक नई राष्ट्रीय-चेतना का प्रयास किया है।

काव्यमयता एवं भाव-  प्रवणता जयशंकर प्रसाद पहले एक कवि हैं तथा बाद में कहानीकार। अतः एक सहृदय कवि की भावुकता उनकी कहानियों में सहज ही प्रवेश कर गई है। उनकी कहानियों की गद्य-शैली में काव्यमयता के दर्शन होते हैं। उनकी कहानियों में ह्दय की सच्ची अनुभूतियों की मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति हुई है। सच्ची अनुभूति, कल्पना व भावुकता के अद्भुत मिश्रण ने उनके कहानियों को काव्यमयी बना दिया है।

मानवतावाद-  जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad) ने अपनी कहानियों में अन्याय, अत्याचार, शोषण, दमन, हिंसा आदि का विरोध किया है। उनके अधिकांश पात्र विषम परिस्थितियों में भी समाज के प्रतिकूल आचरण करते हैं, परन्तु अवसर पड़ने पर, वह असामाजिक होते हुए भी त्याग, बलिदान एवं परोपकार करने के लिए उद्धत हो उठते हैं। उदाहरण के लिए उनकी कहानी गुंडा का नायक नन्हकू सिंह काशी का बदनाम गुंडा होकर भी अपने राजा-रानी व राजकुमार की रक्षा के लिए अपने प्राण का बलिदान कर देता है।

भाषा एवं शैली (Jaishankar Prasad ki Bhasha Shaili)

जयशंकर मूलतः छायावादी कवि हैं और छायावादी कवियों की यह प्रवृत्ति रही है कि उन्होंने अपनी रचना में तत्सम शब्दावली का सर्वाधिक प्रयोग किया है। प्रसाद जी ने अपनी कहानियों में भी तत्सम शब्दावली का अधिक प्रयोग किया है। भाव-प्रवणता के कारण उनकी कहानियों की भाषा काव्यमयी हो गई है। उनकी कहानियों में शुद्ध एवं परिनिष्ठित हिन्दी के साथ-साथ उनकी कहीं-कहीं सरल सहज भाषा का भी प्रयोग हुआ है।

प्रसाद जी ने अपनी कहानियों में अरबी फारसी आदि विदेशी भाषाओं के शब्दों का भी प्रयोग किया है। उन्होंने अपनी भाषा में लोकोक्तियाँ, मुहावरों आदि का प्रयोग करके उसे गुड-अर्थ-गर्भित व रोचक भी बना दिया है। उन्होंने अपनी कहानियों में वर्णनात्मक, मनोविश्लेषणात्मक, चिंतनपरक, भावात्मक आदि शैलियों का प्रयोग किया है।


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