Mahadevi Verma Ka Jeevan Parichay in Hindi

Mahadevi Verma Ka Jeevan Parichay (महादेवी वर्मा का जीवन परिचय)

दोस्तों Hinditipsguide.com की एक और नई पोस्ट में आप सभी का स्वागत है। आज हम लेकर आये है हिंदी साहित्य की महान साहित्यकार महादेवी वर्मा का जीवन परिचय (mahadevi verma ka jeevan parichay)। अन्य पोस्ट की तरह उम्मीद करते है आप सभी को आज की ये पोस्ट भी जरूर पसंद आएगी। महादेवी जी के जीवन परिचय के साथ साथ हम महादेवी वर्मा की रचनाएँ (Mahadevi Verma Ki Rachnaye), महादेवी वर्मा की कविताएं (Mahadevi Verma Poems), महादेवी वर्मा की कहानियों (Mahadevi Verma Stories in Hindi) के बारे में भी हिंदी भाषा में चर्चा करने वाले है। उम्मीद करते हैं महादेवी वर्मा से जुडी इस पोस्ट के माध्यम से आप उनके बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगें। चलिए जान लेते है महान साहित्यकार महदेवी वर्मा (About Mahadevi Verma in Hindi) के बारे में, बिना किसी देरी किये। (class 10 hindi jivan parichay)

Mahadevi Verma Biography in Hindi

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

जीवन परिचय महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) आधुनिक हिंदी साहित्य के छायावाद की प्रमुख स्तंभ है। उनका जन्म सन‌् 1907 ई॰ में उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद में हुआ था। उनके पिता का नाम गोविंद प्रसाद वर्मा था तथा उनकी माता हेमारानी एक भक्त हृदय महिला थी। बचपन से ही महादेवी जी के मन पर भक्ति का प्रभाव पड़ा। इनकी शिक्षा इंदौर तथा प्रयाग में हुई इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से एम॰ए॰ संस्कृत की परीक्षा पास की। ये प्रयाग महिला विद्यापीठ के प्राचार्य पद पर भी कार्यरत रहीं। महादेवी जी (Mahadevi Verma) आजीवन अध्ययन अध्यापन कार्य में लीन रहीं।1956 ई॰  मैं भारत सरकार ने इनको पदम‌्भूषण की उपाधि से विभूषित किया। सन‌् 1983 ई॰ में ‌‌यामा संग्रह पर इनको ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनकी साहित्य सेवा को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने उनको डी॰ लिट् की उपाधि से अलंकृत किया। सन 1987 ई॰ में यह महान साहित्य सेवी अपना महान साहित्य संसार को सौंपकर चिरनिद्रा में लीन हो ग‌ई।

महादेवी वर्मा की रचनाएं- (mahadevi verma ki rachna/kritiyan)

महादेवी वर्मा जी एक महान साहित्य सेवी थी‌ं। वे बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार मानी जाती है। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से अनेक साहित्य विधाओं का विकास किया ‌है। उनकी प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित है-

  • काव्य संग्रह- दीपाशिखा, यामा निहार निरजा, रश्म, संध्यगीत।
  • संस्मरण और रेखाचित्र- अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएं, पथ के साथी, मेरा परिवार।
  • निबंध- संग्रह- श्रृंखला की कड़ियां, आपदा, संकलिप्ता, भारतीय संस्कृति के स्वर, क्षणदा।
  • आलोचना- विभिन्न काव्य संग्रहों की भूमिकाएँ, हिंदी का विवेचनात्मक गद्य।
  • संपादन- चांद, आधुनिक कवि काव्य माला आदि।

Mahadevi Verma Ka Sahityik Parichay in Hindi – (महादेवी वर्मा साहित्यक परिचय)

साहित्यिक विशेषताएं महादेवी वर्मा जी आधुनिक हिंदी साहित्य की मीरा मानी जाती है। वे छायावाद की महान् कवयित्री है लेकिन काव्य के साथ-साथ गद्य में भी उनका महान योगदान रहा है। वे एक साहित्य सेवी और समाजसेवी दोनों रूपों में प्रसिद्ध हैं। उनका पद्य साहित्य जितना अधिक आत्म केंद्रित है, गद्य साहित्य उतना ही समाज केंद्रित है।

महादेवी वर्मा के गद्य साहित्य की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है-

समाज का यथार्थ चित्रण-  महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) जी ने अपने गद्य साहित्य में समकालीन समाज का यथार्थ चित्रण किया है। काव्य में जहां उन्होंने अपने सुख-दुख वेदना आदि का चित्रण किया है वहीं गद्य में समाज के सुख-दुख, गरीबी, शोषण आदि का यथार्थ वर्णन किया है। उनकी रेखाचित्रों एवं संस्मरणों में समाज में फैली गरीबी कुरीतियों जाति पति भेदभाव धर्म संप्रदायवाद आदि विसंगतियों का यथार्थ के धरातल पर अंकन हुआ है। वह एक समाजसेवी लेखिका थीं। अतः आजीवन साहित्य सेवा के साथ-साथ समाज का उद्धार करने लगी रही।

निम्न वर्ग के प्रति सहानुभूति- महादेवी जी एक कोमल हृदय लेखिका थी। उनके जीवन पर महात्मा बुद्ध, विवेकानंद स्वामी, रामतीर्थ आदि के विचारों का गहन प्रभाव पड़ा जिसके कारण उनकी निम्न वर्ग के प्रति गहरी सहानुभूति रही है। उनके गद्य साहित्य में समाज के पिछड़े वर्ग के अत्यंत मार्मिक चित्र चित्रित है। उन्होंने समाज के उच्च वर्ग द्वारा अपेक्षित कहे जाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। यही कारण है कि उन्होंने अपने गद्य साहित्य में अधिकांश पात्र निम्न वर्ग से ग्रहण किए हैं।

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मानवेतर प्राणियों के प्रति प्रेम-भावना- महादेवी जी (Mahadevi Verma) केवल मानव प्रेमी नहीं थी बल्कि अन्य प्राणियों से भी उनका गहन लगाव था। उन्होंने अपने घर में भी कुत्ते, बिल्ली, गाय, नेवला आदि को पाला हुआ था। इनके रेखाचित्रों एवं संस्मरणों में इन मानवेतर प्राणियों के प्रति इनका गहन प्रेम और वेदना झंकृत होता है। जैसे

लूसी के लिए भी रोए परंतु जिसे सबसे अधिक रोना चाहिए था, वह बच्चा तो कुछ जानता ही न था। एक दिन पहले उसकी आंखें खुली थी, अतः मां‌ से अधिक वह दूध के अभाव में शोर मचाने लगा। दुग्ध चूर्ण से उस से दूध बनाकर उसे पिलाया पर रजाई में भी वह मां के पेट की उष्णता खोजता और न पाने पर रोता चिल्लाता रहा। अंत में हमने उसे कोमल ऊन और अधूरे स्वेटर की डलिया में रख दिया, जहां वह मां के समीप्य सुख के भ्रम में सो गया।

करुणा एवं प्रेम भावना का चित्रण- महादेवी वर्मा जी के गद्य साहित्य की मूल संवेदना करुणा एवं प्रेम है। इनके साहित्य पर बुद्ध की करूणा एवं दुःखवाद का गहन प्रभाव पड़ा है। यही कारण है कि इनके गद्य साहित्य में मानव एवं मानवेतर प्राणियों के प्रति करूणा एवं प्रेम भावना अध्ययन सजीव हो उठी है।

समाज सुधार की भावना- महादेवी जी (Mahadevi Verma) एक समाजसेवी भावना से ओत-प्रोत महिला थी। उनके जीवन पर बुद्ध विवेकानंद आदि विचारकों का बहुत प्रभाव पड़ा जिसके कारण उनकी वृत्ती समाज सेवा की ओर उन्मुख हो गई थी। उन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों, विसंगतियों, विडंबनाओं आदि को उखाड़ने के भरपूर प्रयास किए है। उन्होंने अपने गद्य साहित्य में नारी शिक्षा का भरपूर समर्थन किया है तथा नारी शोषण, बाल विवाह आदि बुराइयों का कुल का खंडन किया है।

वात्सल्य भावना का चित्रण- महादेवी वर्मा की गद्य साहित्य में वात्सल्य रस का अनूठा चित्रण हुआ है। उनको मानव ही नहीं मानवेतर प्राणियों से भी वत्सल प्रेम था। वे अपने घर में पाले हुए कुत्ते, बिल्लियों, नेवला, गाय आदि प्राणियों की एक मां के समान सेवा करती थी। यही प्रेम और सेवा भावना उनके रेखाचित्र और संस्मरणों में भी अभिव्यक्त हुई है। लूसी नामक कुत्तिया की मृत्यु होने पर लेखिका एक मां की तरह बिलख-बिलख रो पड़ी थी।

महादेवी वर्मा की भाषा शैली (Mahadevi Verma Ki Bhasha Shaili)

महादेवी वर्मा जी (Mahadevi Verma) एक श्रेष्ठ कवियत्री होने के साथ-साथ कुशल लेखिका भी थी। काव्य के साथ-साथ इनका गद्य साहित्य अत्यंत उत्कृष्ट है। इनके गद्य साहित्य की भाषा तत्सम प्रधान शब्दावली संयुक्त खड़ी बोली है। जिसमें अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, तद्भव तथा साधारण बोलचाल की भाषाओं के शब्दों का समायोजन हुआ है। इनकी भाषा अत्यंत सहज सरल एवं प्रवाह पूर्ण है। महादेवी वर्मा ने अपने निबंधों रेखाचित्र और संस्मरण में अनेक शैलियों को स्थान दिया है।

इनके गद्य साहित्य में भावनात्मक, समीक्षात्मक, संस्मरणात्मक, इतिवृत्तात्मक, व्यंगात्मक आदि अनेक शैलियों का रूप दृष्टिगोचर होता है। मर्म स्र्प‌शिता इनके गद्य की प्रमुख विशेषता है। महादेवी वर्मा जी ने भाव प्रधान रेखा चित्र को भी इतिवृत्तात्मक से मंडित किया है। मुहावरों एवं लोकोक्तियों के कारण उनकी भाषा में रोचकता उत्पन्न हो गई है।

कहीं-कहीं अंलकारयुक्त शैली का प्रयोग भी हुआ है। वहां उनकी भाषा में अधिक प्रवाहमयता और सजीवता उत्पन्न हो गई है। इनकी भाषा पाठक के विषय क्षेत्र तारतम्य स्थापित कर उसके हृदय पर अमिट छाप छोड़ देती है। वस्तुतः महादेवी वर्मा जी प्रतिष्ठित कवियत्री होने के साथ-साथ महान् लेखिका भी थी। उनका गद्य साहित्य हिंदी साहित्य में विशेष स्थान रखता है ।

महादेवी वर्मा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रशन -

प्रश्न- महादेवी वर्मा का जन्म कब हुआ ?

उत्तर – 1907 ई.

प्रश्न- महादेवी वर्मा की मृत्यु कब हुई ?

उत्तर – 1987 ई.

प्रश्न- महादेवी वर्मा के पिता का नाम क्या है?

उत्तर – गोबिंद प्रसाद वर्मा। 

प्रश्न- महादेवी वर्मा का जन्म कहाँ हुआ ?

उत्तर – उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद 

प्रश्न- महादेवी वर्मा को पद्मभूषण की उपाधि कब मिली?

उत्तर – 1956 ई.

प्रश्न- महादेवी वर्मा को ज्ञानपीठ पुरस्कार कब मिला?

उत्तर – 1983 ई.

प्रश्न- महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ कौनसी है?

उत्तर – अतीत के चलचित्र, नीरजा, नीहार। 

Mahadevi Verma Wikipedia Link-

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