Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi – बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ निबंध

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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ हिंदी निबंध – Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi

आज की पोस्ट में आप हम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ निबंध (Beti Bachao Beti Padhao Nimbandh). अक्षर परीक्षा में अलग अलग विषयों पर निबंध लिखने के लिए प्रश्न पूछ लिए जाते है। उन्हीं विषयों में से एक विषय बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ (Beti Bachao Beti Padhao) का भी है जो की काफी महत्वपूर्ण भी है। इसलिए अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए आपको इस विषय के बारे में जानकारी होना भी बहुत जरुरी है।

बचाओ-बेटी पढ़ाओ (Beti Bachao Beti Padhao)

महिलायें प्रेमपात्र पुत्री है, स्नेहमयी भगिनी हैं, कर्तव्यशीला पत्नी हैं और भावी नागरिकों की माता है अथार्त ये पुरष जीवन का अवलम्ब हैं। किंतु वर्तमान पुरष सत्तावादी समाज ने इस सन्दर्भ में आत्मघाती परिदर्शय का खाका तैयार किया है और ताज़्ज़ुब की बात यह है कि इस मर्दवादी सोच का दायरा केवल पुरष वर्ग तक ही सिमित नहीं है अपितु महिलाओं के एक बड़े वर्ग को भी इसने संक्रमित किया है।  सास-बहू के झगडे, जेठानी-देवरानी के किस्से और पुत्र -पुत्रियों के बीच दो आँख करने की ख़बरें आये दिन मिडिया की सुर्ख़ियां बनी रहती है। यदि इस स्याह पर सफेदी चढ़ानी है तो बदलाव की शुरआत भी माँ की कोख से ही करनी होगी, जिसकी पहल माननीय प्रधानमंत्री ने 22 जनवरी 2015 को हरियाणा से की है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ हिंदी स्लोगन – Beti Bachao Beti Padhao Slogan in Hindi

मुख्य स्लोगन पंक्ति – “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”

  • बेटी पढ़ेगी, तभी तो आगे बढ़ेगी।
  • बेटी है जीवन का आधार।
  • बेटी का करोगे नाश, तो हो जाएगा सब का विनाश।
  • बेटियां है अनमोल, इनका ना लगाओ कोई मोल।
  • सोच बदलो, बेटा बेटी एक समान।
  • सुख-दुःख का सहारा, बेटियां हमारी शान है।
  • सोच बदलो बेटी आई है, मानो घर में लक्ष्मी आई है।
  • अबकी बार, बेटी की पढ़ाई जरूरी।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना से जुड़े मुख्य बिन्दु – 

  • हरियाणा के पानीपत से प्रधानमंत्री द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना (beti bachao beti padhao yojana)  को शुरू किया गया।
  • गणतंत्र दिवस की झांकी – “बधाई हो बेटी हुई है”
  • नोडल एजेंसी – महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
  • सहायक – HRDM + स्वास्थय व परिवार कल्याण।
  • ब्रांड एम्बेस्डर – माधुरी दीक्षित
  • लक्ष्य – बालिका जन्मोत्सव मनाना व उसे शिक्षित बनाना।
  • गुड्डा-गुड्डी बोर्ड द्वारा लिंगानुपात विवरण का सर्वजनिक प्रदर्शन ताकि लोग बिगड़ते लिंगानुपात के प्रति जागरूक हो।
  • लैंगिक पूर्वाग्रह का समापन।
  • बेटी बचाओ व संरक्षण।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की रणनीति
  • 100  जिलों में पायटल प्रोजेक्ट बनाना। जिलों के चयन का आधार भी विशेष योजना के तहत जो इस प्रकार है –

ऐसे जिले जहाँ  0 -6 आयु समूह का लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से कम है। राष्ट्रीय औसत जो की 919 है। या फिर इसके आस पास लिंगानुपात की दर उस जिले की है। दूसरा जिन जिलों का अनुपात अधिक है वहाँ पर ये पायलट प्रोजेक्ट प्रोत्साहन के तौर पर बनायें जाएंगे।

  • बेटी जन्मोत्सव की खुसी व बेटियों पर गर्व।
  • बेटियों को पराया धन माने जाने वाली मानसिकता का विरोध।
  • लैंगिक समानता को बढ़ावा।
  • सामजिक कुरीतयों का द्रढ़ता से विरोध।
  • बालिका शिक्षा को मज़बूत करना।
  • कम होते लिंगानुपात के प्रति लोगो को जागरूक करना।
  • लड़कियों के लिए सुरक्षित व भयमुक्त वातावरण का निर्माण।
वर्तमान स्थिति व आवश्कता

आज के समय में घर – सार्वजनिक स्तर तक कमज़ोर स्थिति बनती जा रही है। लिंगानुपात के स्थिति भी निरंतर बिगड़ती जा रही है। लड़कियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता। हालांकि शिक्षा के मामले में थोड़े सुधार देखने को है पहले के समय के मुकाबले में लेकिन आज भी लड़कियों की शिक्षा कही न कही एक सोचनीय विषय जरूर है।  लैंगिक भेदभाव, उत्पीड़न, छेड़खानी व बलत्कार जैसी अप्रिय व अमानीय घटना आज भी कही न कही हमारे समाज में आये दिन देखने सुनने को मिलती है जिस से नज़र आता है की आज भी लड़कियां महफूज़ नहीं है।

हमारे भारत के कुछ राज्य ऐसे है जहाँ के लिंगानुपात आंकड़े काफी अंसतुलित है यानी की काफी खराब है। इस बिगड़ते लिंग अनुपात की वजह से कुछ राज्यों में विवाह न होने जैसी समस्याएँ गंभीर होती जा रही है। अधिकतर महिलाएं कमज़ोर मनोबल की वजह से खुद को असुरक्षित समझती है। इसलिए महिलाओं का मनोबल बढ़ाने को लेकर भी विशेष प्रयास की आवश्कता है।

स्थिति में सुधार से पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव -

निरंतर बिगड़ते लैंगिक अनुपात व अशिक्षित बेटियों की वजह से कितनी समस्या हो सकती है ये हम जान चुके है। लेकिन अगर यही लिंगानुपात अच्छा हो जाए तो हमारे देश पर कितने सकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं क्या आपने ऐसा कभी सोचा है। अगर इनके बारे में बात करें तो ऐसे बहुत से सकरात्मक प्रभाव हमे देखने को मिलेंगें अगर लिंगानुपात और लड़कियों की शिक्षा में सुधार आता है तो।  जैसे की – बेटी-बहन-माता-पत्नी की स्वस्थ चेन बनेगी, जो की किसी भी समाज का आधार भी होती है। स्वस्थ व जागरूकता फैलेगी। विवाह जैसी समस्या सामने नहीं आयेगी। हमारे देश की अन्तर्राष्ट्रीय छवि अच्छी होगी। स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज होने की वजह से एक खुशहाल राष्ट्र बनेगा।


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आने वाली बाधाएँ

हमारी सरकार इतनी मेहनत के बाद भी इस लिंगनुपात जैसी समस्या को जड़ से क्यों नहीं ख़तम पा रही है और किस कारण से हमारी बेटियों को इस दुनिया में आने से पहले ही मार दिया जाता है या फिर उन्हें शिक्षित क्यों नहीं किया जाता ? वो सुरक्षित क्यों नहीं है ? इतने कठिन प्रयास के बाद भी ऐसे सवाल बार बार क्यों उठ जाते है। ऐसा इसलिए क्योकि कुछ बाधाएँ आज भी सरकार के समुख है जिसके रहते हम और हमारी सरकार “बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ” (Beti Bachao Beti Padhao) के इस मिशन में अभी तक पूर्ण रूप से जीत नहीं पायें है।

जैसे की हमारे समाज की जटिल सरंचना का होना, जातीय-धार्मिक पूर्वाग्रह, लोगो लड़कियों के प्रति संकीर्ण सोच का तरीका व लोगो का अपनी नियति पर निर्भर होना। वहीं इनके अतिरिक्त कुछ अन्य समस्याएँ भी इस मिशन में बाधा डालने के लिए कहि न कहि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुडी है जैसी की भ्रस्टाचार, लालफीताशाही, पारदर्शिता व दायित्व का, लचीली कानून प्रणाली आदि।

मूलयांकन

यह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना (beti bachao beti padhao yojana) अपने वर्तमान स्वरूप में देश के अतीत की कमियों को दूर करके उसके भावी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सहायक होगी। मज़बूत राष्ट्र के लिए स्वस्थ व संतुलित परिवार तथा समाज आवश्यक है। विज़न 2020, सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य 2016 -30  अंतरास्ट्रीय समझौतों व प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दृष्टि से भी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना सार्थक है।

संपोषणीय व असंतुलित विकास की अवधारणा को भी मूर्त रूप देने की दृष्टि से इस तरह की पहल बेहद प्रसांगिक है। ऐसी योजना के माध्यम से सभी के बीच फैली बेटी को बोझ समझने की गलत अवधारणा में परवर्ती होगी व लैंगिक समानता का भाव पनपेगा। चूँकि यह योजना बेटी को उसकी माँ के गर्भ से लेकर आत्मनिर्भर बनाने तक बिटयों की सुरक्षा मज़बूत करती है अतः पहले की योजनाओं की अपेक्षा अधिक समेकित व व्यवहारिक दिखाई देती है।

निष्कर्ष

इस प्रकार पढ़ी लिखी लड़की रोशनी है घर की के भाव को आत्मसात करती यह योजना निश्चित रूप से बाल लिंगानुपात की गिरावट को रोकने और उसमे वृद्धि करने की एक मजबूक पहल है। इससे महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें सम्मान दिलाने और अवसरों को उपलब्ध कराने का एक मंच तैयार होगा। इसकी बदौलत भारत अपना संतुलित और समावेशी विकास करके न केवल अपने भावी लक्ष्यों को पूरा करेगा बल्कि शिक्षित भारत और सशक्त भारत भी बनेगा।

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उम्मीद करते है आपको बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ निबंध अच्छे से समझ आया होगा। किसी भी प्रकार के सवाल अथवा सुझाव के लिए आप हमे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते है। अगर आप इस निबंध को पीडीऍफ़ फॉर्मेट में डाउनलोड करना चाहते है तो हमें कमेंट बॉक्स के माध्यम से जरूर बताएं ताकि हम आपके लिए डाउनलोड लिंक उपलब्ध करवा सकें। इसी तरह के अन्य हिंदी विषयों के लिए हमारी वेबसाइट हिंदी टिप्स गाइड पर विजिट करते रहें। 

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