Environment Essay in Hindi With Headings – पर्यावरण प्रदूषण निबंध

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Environment Essay in Hindi With Headings | Pollution Essay in Hindi

पर्यावरण सुरक्षा (paryavaran suraksha) एक अनिवार्य विषय है। इसलिए आज हम पर्यावरण प्रदूषण निबंध (Environment Essay in Hindi) आपके साथ साँझा करने जा रहे है। पर्यावरण की सुरक्षा के विषय को देखते हुए इसकी परीक्षा में पूछे जाने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए अन्य हिंदी निबंध (Hindi Essay) विषयों के साथ साथ आपको इस विषय के बारे में भी आवशय ज्ञान होना चाहिए। तो चलिए बिना देरी किये आज के पर्यावरण सुरक्षा निबंध (paryavaran suraksha essay in Hindi) को शुरू करते Environment Essay को परीक्षा में कई तरह से पूछ लिया जाता है जैसे की – Pollution essay in Hindi or Essay on Pollution in Hindi.

Paryavaran Suraksha Essay in Hindi – पर्यावरण सुरक्षा निबंध

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

पर्यावरण प्रदूषण (Environment Pollution) के कारण ही पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। इस ताप का प्रभाव ध्वनि की गति पर भी पड़ता है। तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस ताप बढ़ने पर ध्वनि की गति लगभग साठ सेंटीमीटर प्रति सेकंड बढ़ जाती है। आज हर ध्वनि की गति तीव्र है और श्रवण शक्ति का हास हो रहा है।  यही कारण है कि आज बहुत दूर से घोड़ों के टापों की आवाज जमीन पर कान लगाकर नहीं सुनी जा सकती। जबकि प्राचीन काल में राजाओं की सेना इस तकनीक का प्रयोग करती थी।

बढ़ते उद्योगों, महानगरों के विस्तार तथा सड़कों पर बढ़ते वाहनों के बोझ ने हमारे समक्ष कई तरह की समस्या खड़ी कर दी है।  इनमें से सबसे भयंकर समस्या है प्रदूषण (Pollution) । हमसे हमारा पर्यावरण संतुलन तो बिगड़ ही रहा है साथ ही यह प्रकृति प्रदत वायु व जल को भी दूषित कर रहा है। पर्यावरण में प्रदूषण (paryavaran pradushan) कई प्रकार के हैं। इनमें मुख्य रूप से ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण (Water Pollution) शामिल हैं। इनसे हमारा सामाजिक जीवन प्रभावित होने लगा है। तरह-तरह के रोग उत्पन्न होने लगे हैं।

औद्योगिक संस्थाओं को कूड़ा-करकट रासायनिक द्रव्य व इनसे निकलने वाला अवजल नाली-नालो से होते हुए नदियों में गिर रहे हैं। इसके अतिरिक्त अंत्येष्टि के अवशेष तथा छोटे बच्चों के शव को नदी में बहाने की प्रथा है। इनके परिणाम स्वरूप नदी का पानी दूषित होता जाता है।  हालांकि नदी के इस जल को वैज्ञानिक तरीके से शोधित कर पेयजल बनाया जाता है।

Essay on Environment in Hindi – पर्यावरण पर निबंध हिंदी 

लेकिन इस कथित शुद्ध जल के प्रयोग से कई प्रकार के विकार उत्पन्न हो रहे हैं। इनमें खाद्य विषाक्तता तथा चर्म रोग प्रमुख है। प्रदूषित जल (polluted water) मानव जीवन को ही नहीं कई अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित करता है।  इससे कृषि क्षेत्र भी अछूता नहीं है। प्रदूषित जल से खेतों में सिंचाई करने के कारण उनमें उत्पन्न होने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता वह उसके अन्य पक्षों पर भी उसका दुष्प्रभाव पड़ता है।

शुद्ध वायु जीवित रहने के साथ-साथ हमारे जीवन के लिए आवश्यक है। शुद्ध वायु का स्त्रोत वन, हरे-भरे बाग वह लहराते पेड़-पौधे हैं। क्योंकि यह जहां प्रदूषण के भक्षक हैं वही यह हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।  बढ़ती जनसंख्या के कारण आवास की समस्या उत्पन्न होने लग रही हैं। मानव ने अपनी आवासीय पूर्ति के लिए वन क्षेत्रों और वृक्षों का भारी मात्रा में दोहन किया।

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इसके अलावा हरित पट्टियों पर कंक्रीट के जाल रूपी सड़कें बिछा दी है।  इस कारण हमें शुद्ध वायु नहीं मिल पा रही। इसके अतिरिक्त कारखानों से निकलने वाली विषैली गैसे, धुंआ, कूड़े-कचरे से उत्पन्न गैस वायु को प्रदूषित कर रही है। रही सही कसर पेट्रोलियम पदार्थ से चलने वाले वाहनों ने पूरी कर दी है। स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार, बस, ट्रक आदि वाहन दिन रात सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनसे जो धुआ निकलता है उसमें कार्बन डीऑक्सीड, सल्फ्यूरिक एसिड और शीशे के तत्व शामिल होते हैं। जो हमारे वायुमंडल में घुलकर उसे प्रदूषित करते हैं।

दिल्ली जैसे महानगर में वायु को प्रदूषित करने में वाहनों की अहम भूमिका है। वायु को प्रदूषित करने में उनका हिस्सा 60% तथा शेष कारखानों व अन्य स्त्रोतों के जरिए होता है। वायु प्रदूषण (Air Pollution) में श्वास  संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं। इसके अलावा यह हमारे नेत्रों  व त्वचा को भी प्रभावित करते हैं।

Environment Pollution Essay in Hindi – पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी 

हमारे वातावरण में मनुष्य की ध्वनि के अतिरिक्त प्रकृति और प्राकृतिक वातावरण (Natural Environment) से सुनाई देने वाले कुछ ध्वनियां है। पक्षियों के चहचाने, पत्तों का टकराने, बादलों और समुंदर की हल्की गर्जना आदि से भी ध्वनि उत्पन्न होती हैं। इन ध्वनियों को प्रकृति का संगीत मानकर उसका आनंद लिया जाता है। लेकिन यही धव्नियां जब तेज हो उठती है तो कानों को चुभने लगती हैं। तेज ध्वनि से कानों के पर्दे फट जाने और व्यक्ति के बहरा हो जाने का अध्ययन होता है। इस भयप्रद ध्वनियों के प्रभाव को वास्तव में ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) कहा जाता है।

प्रातः से ही हम ध्वनि में प्रदूषण का शिकार होने लगते हैं। इस समय मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों में कीर्तन मंडलियों द्वारा लाउडस्पीकर चलाकर भजन गाए जाते हैं। यह भी ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) का एक बहुत बड़ा हानिप्रद कारण है। इन पर अंकुश लगाने में हमारा धर्म आड़े आ जाता है। यही कारण है कि इस पर कानूनी अंकुश लगाने में सफलता नहीं मिल पा रही है।

इसके अतिरिक्त मोटरों, कारों, ट्रकों, बसों, स्कूटर आदि की तेज आवाज वाले हार्न तेज गति व आवाज से दौड़ती रेलें, कल-कारखानों के बजते भोपू व मशीनों की आवाज भी ध्वनि प्रदूषण फैलाती है। संगीत की कोकिल ध्वनि चित को जहां शांति व  खुशी प्रदान करती है वहीं दूसरी ओर वाहनों का शोर हमें कान की व्याधि का शिकार बना रहा है। ध्वनि व शोर में कोई अधिक अंतर नहीं है। शोर वह ध्वनि है जिसे हम नहीं चाहते अधिक तीव्रता एवं प्रबलता की ध्वनि ही शोर कहलाती हैं।

बड़े शहरों के खुले वातावरण में 30 डेसिबल का शोर हर समय रहता है। कभी-कभी यह 50 से डेढ़ सौ डेसीबल तक बढ़ जाता है। उल्लेखनीय है कि किसी सोए हुए व्यक्ति की निद्रा 40 डेसिबल के शोर से खुल जाती हैं। पहले प्रातः चिड़ियों की चहचहाट से नींद खुलती थी लेकिन अब मोटर वाहनों की शोरगुल से नींद खुलती है।

Paryavaran Suraksha Essay in Hindi

अकेले दिल्ली में सड़कों पर दौड़ते वाहनों एवं कर्कश कोलाहल से करीब सवा करोड़ से आबादी में से अधिकतर लोग शोर जनित बहरेपन के शिकार हैं। ऐसे लोगों को फुसफुस आहट सुनाई नहीं देती। पचास डेसिबल का शोर हमारे श्रवण शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। दिवाली पर चलाए जाने वाले पटाखों का शोर दौ सौ डेसिबल से भी अधिक होता है।

ध्वनि प्रदूषण कानों की श्रवण शक्ति के लिए तो हानिकारक है ही, साथ ही यह तन मन की शांति को भी प्रभावित करता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण मानव चिड़चिड़ा और असहिष्णु हो जाता है। इसके अलावा अन्य कई विकार पैदा होने लगते हैं।

हमें प्रदूषण से बचने के लिए हरित क्षेत्र विकसित करना होगा। इसके अतिरिक्त आवासीय क्षेत्रों में चल रही औद्योगिक इकाईओं को वहां से स्थानांतरित कर इन इकाइयों से निकलने वाले कचरे को जलाकर नष्ट करने जैसे कुछ उपाय अपनाकर प्रदूषण पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

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or
Pullution Essay in Hindi (Essay on Pollution in Hindi)

Pollution is the situation when the presence of unwanted elements in the environment increases in excessive amounts. There are many types of pollution such as air pollution, water pollution, and noise pollution, etc. The problem of pollution is one of the most serious problems facing human society.

In the past few decades, pollution is increasing rapidly, which is a serious problem for not only a country but the entire world. The main reason for this terrible social problem is increasing the use of industrialization, deforestation, urbanization and the natural substance of contaminating natural resources.

In ancient times, getting resources from nature was a common thing for humans. At that time very few people could imagine that the indiscriminate use of resources could create such a big problem for human beings. It seemed that the reserves of nature were unlimited, which would never end as the population started to grow the exploitation of natural resources continued to increase.

The construction of machines made this work even faster. The impact of the industrial revolution began to appear in the environment. Forest was replaced by big buildings. Factories started to open and the problem of pollution arose on our heads, which is now very difficult to reduce, through the government is constantly engaged in this effort.

Air Pollution– The main reason for this problem is the number of growing automobiles, the presence of poisonous gases, the smoke of industrial companies, etc. The air in which we breathe is becoming the cause of our lung disorder.

Water Pollution- It is also caused by various reasons. Such bacteria, viruses and harmful chemicals, some dangerous pesticides. Organic compounds such as fungicide, ether benzene, industrial ash, waste, etc.which make drinking water poising too.

Noise Pollution– Them main reason for noise pollution is the loud noise due to the increasing population, noise from the factories, the noise of vehicles, instruments and various types of sound coming from all directions. In metros, noise pollution is crossing its peak.

Various types of dangerous diseases such as cancer, heart attack, shortness of breath, cough, eye irritation, and allergies are increasing due to pollution. Unless we take any step to prevent pollution ourselves, we cannot overcome this problem. Therefore, we should try to reduce it together, otherwise, it will be very difficult for the survival of mankind.

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