Shiksha Ka Mahatva Nibandh | शिक्षा का महत्व पर निबंध

Shiksha Ka Mahatva Par Nibandh

शिक्षा का महत्व पर निबंध 

शिक्षा (Shiksha) – ” तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात् अधंकार से मुझे प्रकाश की ओर ले जाओ—यह प्रार्थना भारतीय संस्कृति का मूल स्तम्भ है। प्रकाश में व्यक्ति को सब कुछ दिखाई देता है, अन्धकार में नहीं। प्रकाश से यहाँ तात्पर्य ज्ञान से है। ज्ञान से व्यक्ति का अंधकार नष्ट होता है। उसका वर्तमान और भावी जीने योग्य बनता है। ज्ञान से उसकी सुप्त इन्द्रियाँ जागृत होती हैं। उसकी कार्य क्षमता बढ़ती है जो उसके जीवन को प्रगति पथ पर ले जाती है।

शिक्षा (Shiksha) का क्षेत्र सीमित न होकर विस्तृत है। व्यक्ति जीवन से लेकर मृत्यु तक शिक्षा का पाठ पढ़ता है। प्राचीन काल में शिक्षा गुरुकुलों में होती थी। छात्र पूर्ण शिक्षा ग्रहण करके ही घर वापिस लौटता था। लेकिन आज जगह-जगह सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों में शिक्षण कार्य होता है। वहाँ पर शिक्षक भिन्न-भिन्न विषयों की शिक्षा देते छात्र जब पढ़ने के लिए जाता है तब उसका मानसिक स्तर धीरे-धीरे ऊपर उठने लगता है। उसके मस्तिष्क में तरह-तरह के प्रश्न उठते हैं जैसे-तारे कैसे चमकते हैं? आकाश में व्यक्ति कैसे पहुँच जाता है?

पृथ्वी गोल है या चपटी? रेडियो में ध्वनि और टेलीविजन में तस्वीर कैसे आती है? इन सब प्रश्नों का उत्तर हमें शिक्षा के द्वारा मिलता है। जैसे-जैसे हम शिक्षा (Shiksha) के क्षेत्र में आगे बढ़ते जाते हैं, वैसे-वैसे हमारा ज्ञान विस्तृत होता जाता है।

ज्ञान का अर्थ केवल शब्द ज्ञान नहीं अपितु अर्थ ज्ञान है। यदि सम्पूर्ण पढ़े हुए विषय का अर्थ न जाना जाए तो यह गधे की पीठ पर रखे हुए चंदन के भार की भांति परिश्रम कारक या निरर्थक होता है। अर्थात् जिस तरह चन्दन की लकड़ी को ढोने वाला गधा केवल उस के भार का ही ज्ञान रखता है किन्तु चन्दन की उपयोगिता को नहीं जान सकता। उसी प्रकार जो विद्वान अनेक शास्त्रों का अध्ययन बिना अर्थ समझे करें वह उन गधों की भांति ग्रन्थ-भार मात्र के वाहक हैं।

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विद्या सर्वश्रेष्ठ धन है। इसे चोर भी चुरा नहीं सकता। जो दूसरों को देने पर बढ़ता है। विदेश में विद्या (Shiksha) ही अच्छा मित्र है। विद्या से विनय, विनय से योग्यता, योयता से धन और धर्म, धर्म से सब सुख प्राप्त होते हैं। ज्ञान से बुद्धि तीव्र होती है। जहाँ राजाओं ने लड़ाइयाँ तलवार की नोंक पर जीतीं और साम्राज्य स्थापित किए, वहीं चाणक्य ने अपनी बुद्धि से सम्पूर्ण नन्द वंश का नाश कर चन्द्रगुप्त को राजा बनाया। यहाँ जीत बुद्धि की हुई जिसे धार दी ज्ञान ने।

विद्या और सुख एक साथ प्राप्त नहीं हो सकते। सुख चाहने वाले को विद्या और विद्या चाहने वाले को सुख त्याग देना चाहिए। विद्याहीन पशु-समान है। जिसे कोई पसन्द नहीं करता। इसलिए श्रेष्ठ विद्वान् से ही उत्तम विद्या प्राप्त करनी चाहिए, भले ही वह किसी भी जाति का क्यों न हो-

उत्तम विद्या लीजिए यद्यपि नीच पै होय, परयौ अपावन ठौर में कंचन तजत न कोय।

शिक्षा (Shiksha) व्यक्ति को ज्ञान के प्रकाश से शुभाशुभ, भले बुरे की पहचान कराके आत्म विकास की प्रेरणा देती है। उन्नति का प्रथम सोपान शिक्षा है। उसके अभाव में हम लोकतंत्र और भारतीय संस्कृति की रक्षा नहीं कर सकते। इसलिए जीवन में शिक्षा का महत्व (Shiksha Ka Mahatva) बहुत अधिक है ऐसा हम बिल्कुल कह सकते हैं।


Jeevan Mein Shiksha Ka Mahatva Nibandh

जीवन में शिक्षा का महत्व : निबंध 

घर शिक्षा (Shiksha) प्राप्त करने पहला स्थान है और सभी के जीवन में अभिभावक पहले शिक्षक होते हैं। हम अपने बचपन में, शिक्षा का पहला पाठ अपने घर विशेषरुप से माँ से-से प्राप्त करते हैं। हमारे माता-पिता जीवन में शिक्षा के महत्त्व को बताते हैं। जब हम 3 या 4 साल के हो जाते हैं, तो हम स्कूल में उपयुक्त, नियमित और क्रमबद्ध पढ़ाई के लिए भेजे जाते हैं, जहाँ हमें बहुत-सी परीक्षाएँ देनी पड़ती है, तब हमें एक कक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण मिलता है।

एक-एक कक्षा को उत्तीर्ण करते हुए हम धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, जब तक कि हम 12वीं कक्षा को पास नहीं कर लेते। इसके बाद, तकनीकी या पेशेवर डिग्री की प्राप्ति के लिए तैयारी शुरु कर देते हैं, जिसे उच्च शिक्षा भी कहा जाता है। उच्च शिक्षा (Shiksha) सभी के लिए अच्छी और तकनीकी नौकरी प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक है।

हम अपने अभिभावकों और शिक्षक के प्रयासों के द्वारा अपने जीवन में अच्छे शिक्षित व्यक्ति बनते हैं। वे वास्तव में हमारे शुभचितंक हैं, जिन्होंने हमारे जीवन को सफलता की ओर ले जाने में मदद की। आजकल, शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए बहुत-सी सरकारी योजनाएँ चलायी जा रही हैं ताकि, सभी की उपयुक्त शिक्षा तक पहुँच संभव हो। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को शिक्षा (Shiksha) के महत्त्व और लाभों को दिखाने के लिए टीवी और अखबारों में बहुत से विज्ञापनों को दिखाया जाता है क्योंकि पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गरीबी और शिक्षा की ओर अधूरी जानकारी की वजह से पढ़ाई को उतना महत्त्वपूर्ण नहीं समझते।

पहले, शिक्षा प्रणाली बहुत ही महंगी और कठिन थी, गरीब लोग 12वीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नहीं थे। समाज में लोगों के बीच बहुत अन्तर और असमानता थी। उच्च जाति के लोग, अच्छे से शिक्षा प्राप्त करते थे और निम्न जाति के लोगों को स्कूल या कॉलेज में शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी। यद्यपि, अब शिक्षा की पूरी प्रक्रिया और विषय में बड़े स्तर पर परिवर्तन किए गए हैं।

भारतीय सरकार ने शिक्षा प्रणाली को सुगम व सस्ती बनाने के लिए कानून व नियमों में भी संशोधन किया है ताकि अत्यधिक लोगो को शिक्षा सेवाओं का लाभ मिल सके। सरकार चाहती है कि शिक्षा (Shiksha) से कोई भी वंचित न रहे। इसलिए भारत सरकार का शिक्षा के प्रति यही नारा है कि-सब पढ़े सब बढ़ें सबसे ज़्यादा महत्त्वपूर्ण, दूरस्थ शिक्षा प्रणाली ने उच्च शिक्षा को सस्ता और सुगम बनाया है, ताकि पिछड़े क्षेत्रों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भविष्य में समान शिक्षा और सफलता प्राप्त करने के अवसर मिलें।

भलीभाँति शिक्षित व्यक्ति देश के मजबूत आधार स्तम्भ होते हैं और भविष्य में इसको आगे ले जाने में नेतृत्व करते हैं। इस तरह, शिक्षा (Shiksha) वह उपकरण है, जो जीवन, समाज और राष्ट्र के निर्माण में सहायक है।

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