Short Moral Stories in Hindi | Motivational Stories in Hindi

Motivational Short Stories in Hindi – लघु प्रेरणादायक कहानियाँ

हमारे जीवन में प्रेरणा स्त्रोत का होना बहुत जरुरी है, फिर चाहे वो किसी भी रूप में क्यों न हो। प्रेरणा भी हमेशा सही और अच्छे व्यक्तित्व या फिर विचारों की ही होनी चाहिए। जीवन में प्रेरणा के महत्व को देखते हुए नीचे कुछ लघु प्रेरणादायक कहानियाँ (Motivational Stories) लिखी गयी है। उम्मीद करते है आपको ये कहानियाँ जरुर पसंद आएगी और इन कहानियों से आपको अच्छी सिख मिलेगी जो आपके व्यक्तित्व को निश्चित ही प्रभावित करेगी। अपने आपको मोटीवेट करने के लिए हमेशा प्रेरणादायक कहानियाँ (Moral Stories) पढ़ते रहें।

Motivational Story – 1

चेन्नई में समुद्र के किनारे एक सज्जन धोती कुर्ता में भगवद गीता पढ़ रहे थे।। तभी वहां एक लड़का आया और बोला कि आज साइंस का जमाना है….
फिर भी आप लोग ऐसी किताबे पढ़ते हो…
देखिए जमाना चांद पर पहुंच गया है…
और आप लोग ये गीता रामायण की बातों पर ही अटके हुए हो…..

उन सज्जन पुरुष ने लड़के से पूछा की “तुम गीता के बारे में क्या जानते हो”

अरे ये सब बकवास है ….मैं विक्रम साराभाई रीसर्च संस्थान का छात्र हु…मैं एक वैज्ञानिक हूँ….ये गीता की बातें तो बकवास है हमारे आगे!

वो सज्जन हसने लगे….तभी दो बड़ी बड़ी गाड़िया वहां आयी…एक गाड़ी से कुछ ब्लैक कमांडो निकले….और एक गाड़ी से एक सैनिक।सैनिक ने पीछे का गेट खोला तो वो सज्जन पुरुष चुप चाप गाड़ी में जाकर बैठ गए।

लड़का ये सब देखकर हक्का बक्का था।। उसने दौड़कर उनसे पूंछा—-सर….सर आप कौन है??

वो सज्जन बोले—तुम जिस विक्रम साराभाई रिसर्च इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे हो, मैं वही विक्रम साराभाई हूँ…
लड़के को 440 वाट का झटका लगा।।।।

इसी भगवद गीता को पढ़कर डॉ अब्दुल कलाम ने आजीवन मांस न खाने की प्रतिज्ञा कर ली थी….

गीता एक महाविज्ञान है…..गर्व कीजिये।।

Short Motivational Story – 2

एक व्यापारी अपने ग्राहक को शहद दे रहा था| अचानक व्यापारी के हाथ से छूटकर शहद का बर्तन गिर पड़ा| बहुत-सा शहद भूमि पर ढुलक गया| जितना शहद व्यापारी उठा सकता था, उतना उसने जमीन के ऊपर-ऊपर से उठा लिया; लेकिन कुछ शहद फिर भी जमीन पर गिरा रह गया| बहुत-सी मखियाँ शहद की मिठास के लोभ से आकर उस शहद पर बैठ गयीं| मीठा-मीठा शहद उन्हें बहुत अच्छा लगा|

जल्दी-जल्दी वे उसे चाटने लगीं| जब तक उनका पेट भर नही गया, वे शहद चाटती रहीं| जब मक्खियों का पेट भर गया, उन्होंने उड़ना चाहा| लेकिन उनके पंख शहद से चिपक गये थे| उड़ने के लिये वे जितना छटपटाती थीं, उतने ही उनके पंख चिपकते जाते थे| उनके पुरे शरीर में शहद लगता जाता था|

बहुत-सी मक्खियाँ शहद में लोट-पोट होकर मर गयीं| बहुत-सी पंख चिपकने से छटपटा रहीं थीं| लेकिन दूसरी नयी-नयी मक्खियाँ शहद के लोभ से वहाँ आती-जाती थीं| मरी और छतपटाती मक्खियों कू देखकर भी वे शहद खाने का लोभ छोड़ नहीं पाती थीं|

मक्खियों की दुर्गति और मुर्खता देखकर व्यापारी बोला- ‘जो लोग लोभ में पड़ जाते हैं, वे इन मक्खियों के समान ही मूर्ख होते हैं| स्वाद का थोड़ी देर का सुख उठाने के लोभ से वे अपना स्वास्थ्य नष्ट कर देते हैं, रोगी बनकर छटपटाते हैं और शीघ्र मृत्यु के ग्रास बनते हैं|’

Short Motivational Story – 3

एक बार की बात है, एक निःसंतान राजा था, वह बूढा हो चुका था और उसे राज्य के लिए एक योग्य उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी थी। योग्य उत्तराधिकारी के खोज के लिए राजा ने पुरे राज्य में ढिंढोरा पिटवाया कि अमुक दिन शाम को जो मुझसे मिलने आएगा, उसे मैं अपने राज्य का एक हिस्सा दूंगा। राजा के इस निर्णय से राज्य के प्रधानमंत्री ने रोष जताते हुए राजा से कहा, “महाराज, आपसे मिलने तो बहुत से लोग आएंगे और यदि सभी को उनका भाग देंगे तो राज्य के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे। ऐसा अव्यावहारिक काम न करें।” राजा ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त करते हुए कहा, ”प्रधानमंत्री जी, आप चिंता न करें, देखते रहें, क्या होता है।’*

निश्चित दिन जब सबको मिलना था, राजमहल के बगीचे में राजा ने एक विशाल मेले का आयोजन किया। मेले में नाच-गाने और शराब की महफिल जमी थी, खाने के लिए अनेक स्वादिष्ट पदार्थ थे। मेले में कई खेल भी हो रहे थे।

राजा से मिलने आने वाले कितने ही लोग नाच-गाने में अटक गए, कितने ही सुरा-सुंदरी में, कितने ही आश्चर्यजनक खेलों में मशगूल हो गए तथा कितने ही खाने-पीने, घूमने-फिरने के आनंद में डूब गए। इस तरह समय बीतने लगा।

पर इन सभी के बीच एक व्यक्ति ऐसा भी था जिसने किसी चीज की तरफ देखा भी नहीं, क्योंकि उसके मन में निश्चित ध्येय था कि उसे राजा से मिलना ही है। इसलिए वह बगीचा पार करके राजमहल के दरवाजे पर पहुंच गया। पर वहां खुली तलवार लेकर दो चौकीदार खड़े थे। उन्होंने उसे रोका। उनके रोकने को अनदेखा करके और चौकीदारों को धक्का मारकर वह दौड़कर राजमहल में चला गया, क्योंकि वह निश्चित समय पर राजा से मिलना चाहता था।

जैसे ही वह अंदर पहुंचा, राजा उसे सामने ही मिल गए और उन्होंने कहा, ‘मेरे राज्य में कोई व्यक्ति तो ऐसा मिला जो किसी प्रलोभन में फंसे बिना अपने ध्येय तक पहुंच सका। तुम्हें मैं आधा नहीं पूरा राजपाट दूंगा। तुम मेरे उत्तराधिकारी बनोगे।

शिक्षा (Moral) –
सफल वही होता है जो लक्ष्य का निर्धारण करता है, उसपर अडिग रहता है, रास्ते में आने वाली हर कठिनाइयों का डटकर सामना करता है और छोटी-छोटी कठिनाईयों को नजरअंदाज कर देता है।


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